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होनहार छात्रा से फांसी के तख्त तक! शबनम की कहानी, पुराने दोस्त उस्मान की जुबानी

लखनऊ कभी होनहार स्टूडेंट रही अमरोहा जिले के बावनखेड़ी की शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों का कत्ल कर दिया था। इस वारदात के बाद अब शबनम रामपुर जेल में बंद है। सभी की नजरें शबनम की फांसी की तारीख पर टिकी हुई हैं। हालांकि, इस बीच लोग शबनम से जुड़े कई किस्से जानना चाहते हैं। यह सफर है वर्ष 2003 से 2021 तक का। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की तरफ से हिमांशु तिवारी ने इस किस्से को शबनम के दोस्त रहे उस्मान सैफी से जानने की कोशिश की। उस्मान सैफी ही शबनम के बेटे की देखभाल कर रहे हैं। उस्मान सैफी कहते हैं, 'मैंने 2003 में जेएस हिंदू कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया था और वह बीए फाइनल ईयर में थीं। हमारा उनका एक ही रूट था। बस में कई बार मुलाकात हो जाया करती थी। एक ही चेहरे बार-बार मिलते हैं तो दुआ-सलाम हो जाती थी। 2012 में मैंने एक संस्थान जॉइन किया था। एक साथी इन पर खबर लिख रहे थे। मैंने उनसे कहा कि मैं शबनम को जानता हूं। वो कहने लगे ऐसा तो सब कहते हैं। दरअसल, उस वक्त शबनम मीडिया में हाइलाइट थीं। उन्होंने कहा कि शबनम से कोई मिल नहीं सकता क्योंकि वह किसी से मिलती ही नहीं।' 'और तलाशी के बाद मुझे निकाल दिया गया'उस्मान ने कहा, 'मार्च 2012 की बात है यह, मैं अगले दिन शबनम से मिलने जेल चला गया। मैंने पर्ची लगाई और अंदर से इसे अप्रूवल मिल गया। मैंने सोचा कि लोग कहते हैं कि शबनम किसी से मिलती नहीं लेकिन देखो वो मुझे जानती थी, मेरी पर्ची लगी और वह ओके भी हो गई। मैं अंदर पहुंचा। कैदियों की भीड़ थी। शबनम वहां नहीं थी। मैं अंदर उसे तलाशता रहा। पुलिसवाले अलर्ट हो गए थे। सोचने लगे कि यह क्या चाहता है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्यों घूम रहे हो। मैंने कहा मुझे शबनम से मिलना है। इतना ही कहा उन्होंने मुझे पकड़ लिया। फिर तलाशी ली गई। वो मुझे उतना ही बड़ा अपराधी समझ रहे थे, जितनी बड़ी अपराधी शबनम थी। तलाशी वगैरह लेकर मुझे वहां से निकाल दिया गया।' '...और मुझे सौंप दिया गया शबनम का बच्चा' उस्मान कहते हैं, 'मैं कई बार मुलाकात करने गया लेकिन वह मिलती नहीं थी। मैं अब बुलंदशहर आ गया था। जब मेरा वीकली ऑफ होता था तो मैं उससे मिलने जाता। 2015 में मुझे पता चला कि शबनम का एक बच्चा भी है, जिसे वह गोद देना चाहती है। मैंने मुलाकात के लिए जोर दिया। वह मिलती ही नहीं थी। मुझमें एक जुनून सा भर गया था शबनम से मिलने के लिए। मैंने सोचा कि भले वह किताब के लिए ना मिले लेकिन वह बच्चे को गोद देने के लिए तो मिलेगी। मैंने कोशिश करना शुरू किया। फिर और जिद भर गई। यही सिलसिला चलता रहा। एक रोज मुलाकात हो गई। काफी मुश्किल से वह तैयार हो गई। मुझे बच्चे को 30 जुलाई 2015 को सौंपा गया।' 'इस तरह से उसने मेरी मदद की थी'उस्मान ने कहा, 'उस पर दोष साबित हुआ लेकिन मैं आज भी सोचता हूं कि यह उसने कैसे कर दिया। मैं आजतक उस शबनम से नहीं मिला जिसे दुनिया जानती है। मैं उस शबनम से मिला हूं जो कॉलेज की सहयोगी है। वह मददगार थी। 2004 की बात है, मैंने सोच लिया था कि अब नहीं पढ़ना है क्योंकि मैं एक सब्जेक्ट में फेल हो गया था। उसने इंप्रूवमेंट का फॉर्म भरा, उसने इसके लिए फीस भी भरी। उसने मुझसे कहा कि तुम्हें सिर्फ एग्जाम में बैठना है। तुम पास हो या फेल हो, जो मन में आए वह लिखना। जिसमें मेरे 30 नंबर थे, उसमें मेरे 54-55 नंबर थे। मैं पास हो गया था। पहले से ज्यादा हिम्मत आ गई थी। फिर सोचा कि अब मुझे पढ़ना है। शबनम का मुझ पर बहुत बड़ा एहसान है। यह गाड़ी अगर ट्रैक से उतर जाती तो कोई फायदा नहीं होता। उसने डबल एमए किया, वह शिक्षा मित्र भी रही। उसने कई लोगों की मदद की होगी। यही सब मेरे दिमाग में आया। पहले इसलिए मिलना चाहता था कि लोग उसे जानें कि वह कैसी है। इस बात पर वह राजी नहीं थी।' 'हम सोच रहे थे कभी तो वह पसीजेगी'शबनम के बच्चे के कस्टोडियन उस्मान ने कहा, 'ढाई साल की कड़ी मेहनत के बाद वह मुझे जेल में मिली थी। जनवरी 2015 में उससे पहली मुलाकात हुई थी। उसने खुद को नकाब में ढका हुआ था। मैं उसे याद दिला रहा था कि कैसे हमारी मुलाकात हुई थी। उसने कोई खास जवाब नहीं दिया। मैं कुछ खिलौने वगैरह लेकर गया था। तभी मैंने उससे यह पूछ लिया कि तुमने अपने परिवारवालों को क्यों मारा। यह सब सुनकर वह सामान छोड़कर चली गई। फिर उसने कह दिया था कि वह मुझे तो अपना बेटा गोद नहीं देगी। मुझे बहुत पछतावा हो रहा था। मैं वापस चला आया। मैं बहुत उदास था। मेरे दोस्तों को यह बात मैंने बताई। दोस्तों ने कहा कि जेल के सामने स्ट्राइक करेंगे। कभी तो वह पसीजेगी।' 'वो लोग मुझे पागल कह रहे थे'उस्मान कहते हैं, 'मेरी शादी भी एबनॉर्मल थी। मुझे बच्चे को गोद लेना था। मेरे एक दोस्त हैं राहुल, उन्हें मैंने बताया था कि मैं इस बच्चे को गोद लेना चाहता हूं। उन्होंने काफी मदद की थी। मैंने बच्चे को लेने की प्रक्रिया के तहत अप्लाई किया था। मेरी ऐप्लिकेशन रिजेक्ट कर दी गई थी। वजह के तौर पर मुझसे कहा गया था कि मेरी शादी नहीं हुई। ऐसे में मैं कैसे बच्चे का ख्याल रख पाऊंगा। मैं संबंधित विभाग के कर्मचारियों से कहा कि बस दो घंटे दीजिए मैं शादी करके आता हूं। वहां मौजूद लोग कह रहे थे कि यह एकदम पागल है। अच्छा यह बात मुझे उन्हीं लोगों ने बाद में बताई थी कि वे मुझे पागल कह रहे थे।' 'फिर मैंने वंदना को कॉल किया, वो बोलीं...'उस्मान ने कहा, 'उस वक्त मेरी शादी के लिए कई जगह बात चल रही थी। मैंने कॉल किया, बोला कि मैं तुमसे तुरंत शादी करना चाहता हूं। उन्हें वजह बताई तो वह पीछे हट गई। कहने लगी कि मैं उस बच्चे को तो साथ नहीं रखूंगी। सारे रास्ते बंद हो चुके थे। अब मैंने अपनी दोस्त वंदना को कॉल किया। वह तो शादी ही नहीं करना चाहती थीं। मैंने जब सारी बात उन्हें बताई तो उन्होंने मुझसे कहा कि एक शर्त है कि फिर अपना बच्चा नहीं होगा। इसके साथ ही मैंने शादी कर ली। अब फिर से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया शुरू हुई और मुझे बच्चा मिल गया।' 'मैंने शबनम से कहा...'उस्मान ने बताया, 'शबनम आर्थिक रूप से मजबूत हैं। कई बार उनकी प्रॉपर्टी के साथ मुझे जोड़कर देखा जाता रहा। यहां तक कि मेरे भाई ने भी कहा कि सब प्रॉपर्टी का चक्कर है। शबनम के चाचा ने भी यही बात कही। वह मेरे पिता को परेशान करने लगे थे। फिर मैंने कोतवाली से मदद मांगी। इसके बाद शबनम के चाचा को समझाया गया कि अब वह ऐसा ना करें अन्यथा उन पर कार्रवाई होगी। मैं जब शबनम के पास बच्चे को मिलाने ले गया तो मैंने उनसे कहा कि प्लीज इस संपत्ति को जहां देना हो दे दो। इस तरह की तोहमतें नहीं झेल सकता। फरवरी में जब शबनम से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि वह अपने वकील से बात करके इस संपत्ति को दान करेंगी। मुझे किसी भी तरह का लालच नहीं है।' 'वह सूटबूट वाले पेशे पसंद करता है'उस्मान कहते हैं, 'बच्चा मां का तो कभी जिक्र नहीं करता। हां, वह अपनी नानी के घर जाने की जिद करता है। हम उसे साथ लेकर जाते हैं, फिर वापस आ जाते हैं। इन सभी परिस्थितियों के लिए वह अपनी मां वंदना से जिक्र करता है। कहता है कि इन सभी चीजों के लिए मुझे ही क्यों चुना गया। मैं उसे बताता हूं कि डीएम बहुत पावरफुल होता है तो वह कहता है कि मुझे डीएम बनना है। हां, वह सूटबूट वाले पेशे पसंद करता है। जब हम उसे अपने साथ लेकर आए थे तो वह कोट पैंट चाहता था। फिर उसके लिए सूट तैयार कराया गया। वह हमारे लिए बहुत खास है।'


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होनहार छात्रा से फांसी के तख्त तक! शबनम की कहानी, पुराने दोस्त उस्मान की जुबानी होनहार छात्रा से फांसी के तख्त तक! शबनम की कहानी, पुराने दोस्त उस्मान की जुबानी Reviewed by Fast True News on February 25, 2021 Rating: 5

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