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गलवान शहीदों के नाम स्मारक, चीन को सिखाया था करारा सबक

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) मई से ही भारत और चीन के बीच तनाव की गवाह बनने लगी थी लेकिन 15 जून की आधी रात वह 20 भारतीय जवानों के खून से सन गई। देश की सीमा की रक्षा करने के लिए तैनात जवानों पर डंडे-पत्थरों से हमला किया गया जिसमें ये वीर शहीद हो गए। उस घटना को तीन महीने से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन जवानों की शहादत किसी को भूली नहीं है। अब उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लद्दाख में एक स्मारक भी तैयार किया गया है।

Memorial for India-China Galwan Clash Martyr: भारत और चीन की सेनाओं के बीच जून में हुई झड़प के शहीदों की याद में लद्दाख में स्मारक बनाया गया है। इस पर सभी 20 शहीदों के नाम अंकित हैं।


Ladakh: गलवान शहीदों के नाम स्मारक, चीन को सिखाया था करारा सबक

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी (Galwan Valley) मई से ही भारत और चीन के बीच तनाव की गवाह बनने लगी थी लेकिन 15 जून की आधी रात वह 20 भारतीय जवानों के खून से सन गई। देश की सीमा की रक्षा करने के लिए तैनात जवानों पर डंडे-पत्थरों से हमला किया गया जिसमें ये वीर शहीद हो गए। उस घटना को तीन महीने से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन जवानों की शहादत किसी को भूली नहीं है। अब उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए लद्दाख में एक स्मारक भी तैयार किया गया है।



शहीदों को श्रद्धांजलि
शहीदों को श्रद्धांजलि

लद्दाख की गलवान घाटी में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के तहत Y-जंक्शन के पास चीन की PLA (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) को ऑब्जर्वेशन पोस्ट से हटाने के बाद भारत और चीन के बीच जो कुछ हुआ वह किसी छोटे युद्ध से कम नहीं था। भले इस लड़ाई में गोली-बम नहीं चले लेकिन फिर भी दोनों देशों ने अपने सैनिक गंवा दिए। इस घटना में जान गंवाने वाले सैनिकों के सम्मान में KM-120 पोस्ट के पास यूनिट लेवल पर मेमोरियल बनाया गया है। यह लद्दाख के दुरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी की स्ट्रेटिजिक रोड पर स्थित है। इस पर सभी 20 सैनिकों के नाम अंकित हैं।



शाम को पीछे हटना था...
शाम को पीछे हटना था...

झगड़े की शुरुआत चीन की तरफ से तब हुई जब बातचीत के बाद उसे पीछे हटाया जा रहा था। हाथ, डंडे, पत्थर की यह लड़ाई इतनी भीषण थी कि कई सैनिक घाटी से ही नीचे भी गिर गए। इससे पहले कमांडिंग अफसर (कर्नल) ने चीन के लोकल कमांडर से बात की थी और शाम को भारतीय सेना के ऑफिसर टीम के साथ गलवान वैली में पीपी-14 पहुंचे जहां से चीनी सैनिकों को पीछे हटना था। ऐसा बातचीत में तय हुआ था। तब वहां 10-12 चीनी सैनिक थे।



पत्थरों-लोहे की रॉड से हमला
पत्थरों-लोहे की रॉड से हमला

अचानक बहुत से सैनिक आए और भारतीय ऑफिसर और उनके दो जवानों पर पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला बोल दिया। भारतीय सैनिक चौंक गए और इसका जवाब दिया गया। भारी संख्या में भारतीय सैनिक भी उस पॉइंट पर पहुंचे और आधी रात तक हिंसक झड़प चलती रही। सूत्रों का कहना है कि करीब एक बटैलियन के बीच यह खूनी झड़प हुई यानी करीब 600-700 सैनिक। रात के वक्त हुई झड़प में कई सैनिकों के गहरे नाले में गिरने की भी बात कही गई।



45 साल बाद शहादत
45 साल बाद शहादत

LAC पर 45 साल बाद शहादत हुई है। इससे पहले 1975 में अरुणाचल प्रदेश में चार भारतीय सैनिक शहीद हुए थे, जब चीन के सैनिकों ने घात लगातार हमला किया था। इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया। सेना से लेकर कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की गई। वहीं, रूस में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की बैठक के दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और फिर विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई। हालांकि, इसके बावजूद चीन ने सीमा पर अपनी सेना और हथियारों की तैनाती बढ़ा रही है। इसके जवाब में भारत ने भी ऊंचाई के इलाकों में अपनी सेना तैनात कर दी है।





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गलवान शहीदों के नाम स्मारक, चीन को सिखाया था करारा सबक गलवान शहीदों के नाम स्मारक, चीन को सिखाया था करारा सबक Reviewed by Fast True News on October 02, 2020 Rating: 5

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