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FAQ: क्या अपनी मर्जी से लगा सकेंगे प्रिकॉशन डोज, कैसे बुक करनी होगी तीसरी डोज? जानें इन सब सवालों के जवाब...

नई दिल्ली: ओमीक्रोन वेरिएंट के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पीएम मोदी ने हेल्थकेयर वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर के साथ-साथ 60 साल से ऊपर के बीमार बुजुर्गों के लिए ऐहतियाती डोज यानी वैक्सीन की तीसरी डोज देने की घोषणा कर दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब दुनिया भर में दो डोज के बाद लगने वाली तीसरी डोज को बूस्टर कहा जा रहा है तो पीएम ने इसे ऐहतियाती (प्रिकॉशन) डोज क्यों कहा। असल में वैक्सीन की पहली डोज को प्राइमरी कहा जाता है। पहली डोज वायरस की पहचान कर उसके खिलाफ ऐंटीबॉडी बनाती है, लेकिन जो प्राइमरी डोज होती है और उससे जो ऐंटीबॉडी बनती है, वह आगे भी मेंटेन रहे, इसके लिए दूसरी डोज दी जाती है। हालांकि कोरोना में इस्तेमाल हो रही अधिकतर वैक्सीन की इम्यूनिटी 6 से 8 महीने बाद कम होती पाई गई है, इसलिए इस इम्यूनिटी को बूस्ट करने के लिए तीसरी डोज यानी दी जा रही है। हालांकि पीएम मोदी ने बूस्टर डोज को कहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों में वैज्ञानिक दृष्टि से कोई अंतर नहीं है, लेकिन पीएम ने अपने संबोधन में यह जिक्र किया कि कोरोना वॉरियर्स, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स, कोविड के खिलाफ लड़ाई में देश को सुरक्षित रखने में उनका बहुत बड़ा योगदान है। वो आज भी कोरोना के मरीजों की सेवा में अपना बहुत समय बिताते हैं, इसलिए प्रिकॉशन यानी ऐहतियात की दृष्टि से सरकार ने निर्णय लिया है कि हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज शुरू की जाएगी। डॉक्टर का कहना है कि यह कदम ऐहतियात के लिए लिया गया है, क्योंकि बचाव किसी भी बीमारी का सबसे अच्छा उपाय होता है। हालांकि, दोनों में मेडिकल लिहाज से अंतर नहीं है। बूस्टर कहें या प्रिकॉशन डोज, दोनों ही इम्यूनिटी को और बढ़ाएंगी। 1 जनवरी से ही शुरू करवाएं टीका, ऐंटीबॉडी जांच भी होकोविड एक्सपर्ट और आईएलबीएस हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉक्टर एस के सरीन ने कहा कि देर से ही सही लेकिन दुरुस्त फैसला है, लेकिन संभव हो तो इसे थोड़ा पहले शुरू किया जाए, तभी डबल इम्यूनिटी आएगी। जब तक ओमीक्रोन फैलना शुरू करे और हमारे डॉक्टर संक्रमित हो जाएं, इससे पहले वैक्सीन लग जानी चाहिए। नए साल के शुरुआत से ही वैक्सीन लगने लगे तो बेहतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार डॉक्टर व हेल्थकेयर वर्कर की ऐंटीबॉडी जांच की जाए तो और अच्छा हो, क्योंकि अगर किसी में ऐंटीबॉडी जीरो है तो उनके लिए यह बूस्टर डोज प्राइमरी डोज की तरह काम करेगा। अगर पहले से एंटीबॉडी है तो उसे बूस्ट करेगा, लेकिन जीरो है तो ऐसे के लिए यह प्राइमरी की तरह होगा। उनको अलग कैटेगरी में रखकर आगे दुबारा से प्रोटैक्टिव इम्यूनाइजेशन देना होगा। मैक्स हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एचओडी डॉक्टर अंबरीश मित्तल ने कहा कि अगर यह फैसला एक दो महीने पहले होता तो और बेहतर होता लेकिन अब भी देर नहीं हुई है। इसे जल्द से जल्द शुरू कर देना चाहिए। दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेजिडेंट डॉक्टर अरुण गुप्ता ने कहा कि बूस्टर डोज तो सबके लिए होनी चाहिए। यही नहीं, अभी लिया गया फैसला 15 दिन बाद लागू होगा, यह सही नहीं है। अभी 15 दिन है और इन 15 दिनों में ओमीक्रोन और बढ़ सकता है। वैक्सीन के बाद इम्यूनिटी आने में दो और हफ्ते लग सकते हैं, इससे पूरे महीने में रिस्क रहता है। एक माह में पूरा हो टीकाकरणगंगाराम हॉस्पिटल के कोविड एक्सपर्ट डॉक्टर धीरेन गुप्ता ने कहा कि हमने दूसरी लहर के दौरान देखा कि जिन लोगों को वैक्सीन लग रही थी और वैक्सीन के 5 से 7 दिनों में संक्रमित हो रहे थे, उनमें गंभीरता ज्यादा हो रही थी, इसलिए इस ओर भी ध्यान देना होगा। जब ओमीक्रोन तेजी से फैलने लगेगा और उस समय वैक्सिनेशन का यह भी डर बना रहेगा। डॉक्टर धीरेन ने कहा कि हमारी पहली कोशिश यह होनी चाहिए कि एक महीने में इसे पूरा कर लिया जाए, ताकि अगले 15 दिनों में इम्यूनिटी बन जाए।
  1. कौन ले सकता है तीसरी डोज?हेल्थकेयर वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर के साथ-साथ 60 साल से ऊपर के बीमार बुजुर्ग 10 जनवरी से प्रिकॉशनर डोज यानी वैक्सीन की तीसरी डोज लगवा सकेंगे।
  2. कौन सी बीमारी पर लगेगी वैक्सीन?60 साल से ऊपर के लोगों को तीसरी डोज लगवाने के लिए बीमारी का सर्टिफिकेट लेकर आना होगा जिसमें उनकी बीमारी का जिक्र हो। 45+ वाले बीमार लोगों के लिए टीकाकरण शुरू करते समय जिन बीमारियों की लिस्ट जारी की गई थी, उन्हीं बीमारियों के मामले में मरीज को सर्टिफिकेट दिखाना होगा। इनमें दिल की बीमारियां, डायबीटीज किडनी की बीमारी समेत बीस मर्ज शामिल हैं। यानी बीमारियां वही हैं, बस उम्र की कैटिगरी बदली गई है।
  3. कैसे बुक करानी होगी तीसरी डोज?वैक्सीन की तीसरी डोज लेने के लिए पहले की तरह रजिस्ट्रेशन कराना होगा और कोविन ऐप के जरिए यह संचालित होगा। बीमार बुजुर्गों को मेडिकल सर्टिफिकेट किसी रजिस्टर्ड डॉक्टर से बनवाना होगा। इस सर्टिफिकेट को मरीज के हस्ताक्षर के साथ कोविन पोर्टल पर अपलोड किया जा सकेगा या हार्ड कॉपी लेकर सीधे टीका केंद्र पर जा सकते हैं।
  4. क्या अपनी मर्जी की वैक्सीन लगा सकेंगे तीसरी बार?जिन्हें पहले जिस वैक्सीन की दोनों डोज लगी हैं, उन्हें उसी वैक्सीन की तीसरी डोज दी जा सकती है। अभी तक मिक्स मैच डोज की बात साफ नहीं हुई है।
  5. तीसरी डोज सभी के लिए क्यों नहीं?अब तक की स्टडी में पाया गया कि वैक्सीन का असर छह से आठ महीने बाद कम हो जाता है। हेल्थ केयर वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर, बुजुर्ग व बीमार लोगों को टीका लगवाए करीब एक साल होने वाला है। वहीं 18+ के लिए वैक्सिनेशन शुरू हुए अभी छह माह ही बीते हैं। यही वजह है कि तीसरी डोज अभी सबके लिए नहीं आ रही।


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FAQ: क्या अपनी मर्जी से लगा सकेंगे प्रिकॉशन डोज, कैसे बुक करनी होगी तीसरी डोज? जानें इन सब सवालों के जवाब... FAQ: क्या अपनी मर्जी से लगा सकेंगे प्रिकॉशन डोज, कैसे बुक करनी होगी तीसरी डोज? जानें इन सब सवालों के जवाब... Reviewed by Fast True News on December 26, 2021 Rating: 5

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