मंत्री बनने पर छुए पैर, अर्थी को कंधा...पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह की दोस्ती-दुश्मनी, पूरी कहानी
गोंडा यह कहानी है गोंडा की। ये कहानी है गोंडा जिले की सियासत के दो सबसे बड़े किरदारों की। विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह और बृजभूषण शरण सिंह। पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह अयोध्या से सटे हुए इस जिले में हमेशा दो ध्रुव रहे। कहानी उत्तर प्रदेश की में दोनों की अदावत से पहले बात उन मौकों की जब पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह का रिश्ता बिल्कुल जुदा दिखा। 'पंडित ने छुए पैर और दोनों नेता लिपटकर रोने लगे' पंडित सिंह और बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े एक पुराने वाकये को याद करते हुए गोंडा के वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह ने एनबीटी ऑनलाइन को बताया, 'एक किस्सा है। पंडित सिंह मंत्री हुए थे पहली बार। मुलायम सिंह की सरकार में चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री की कुर्सी मिली थी। 2002 में राजनाथ सिंह के कार्यकाल के बाद बीजेपी चुनाव हार गई थी। मेरी याद में 2003 की बात है। जब ये राज्यमंत्री हुए तो अयोध्या-फैजाबाद रोड पर खोरहंसा एक जगह है। वहां पर मंत्री बनने के बाद पंडित सिंह का अभिनंदन कार्यक्रम था। सभा चल रही थी तभी उधर से बृजभूषण शरण सिंह गुजरे। वो गोंडा आ रहे थे और भीड़ में काफिला रुक गया। पंडित सिंह मंच से उतरकर आए और बृजभूषण सिंह का पैर छुआ। इसके बाद दोनों लोग एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। उसके बाद बृजभूषण आगे निकल गए और पंडित सिंह का कार्यक्रम चलता रहा। 'उस समय दोनों के बीच काफी तनातनी थी। ऐसे में पूरे गोंडा शहर में ये घटना चर्चा का विषय बन गई थी।' जब बृजभूषण सिंह ने पंडित सिंह की अर्थी को दिया कंधा वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह ने आगे बताया, '2008 में न्यूक्लियर डील को लेकर बृजभूषण सिंह बीजेपी से अलग होकर समाजवादी पार्टी में आ गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से विजयी हुए। इस दौरान पंडित सिंह के साथ उनका उठना-बैठना था। पार्टी मीटिंग में भी साथ हो जाते थे। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बृजभूषण सिंह फिर से बीजेपी में आ गए। इसी साल मई में जब कोरोना से पंडित सिंह का निधन हुआ तो बृजभूषण सिंह ने उनकी डेडबॉडी को कंधा दिया। ये तस्वीरें हर किसी के दिल को छू लेने वाली थीं।' पंडित सिंह के बड़े भाई से बृजभूषण की थी गहरी दोस्ती गोंडा के वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह कहते हैं, 'असल में बृजभूषण सिंह का जो प्रादुर्भाव हुआ वह पंडित सिंह के परिवार की वजह से ही हुआ। पंडित सिंह के बड़े भाई रविंदर सिंह थे। उनके पुत्र सूरज सिंह हैं, जो गोंडा सदर सीट से 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार थे। रविंदर सिंह और बृजभूषण सिंह की बड़ी दोस्ती थी। गोंडा, अयोध्या और फैजाबाद के इलाके में ये लोग साथ में ठेकेदारी करते थे। पंडित सिंह के चचेरे बाबा लाट बख्श सिंह थे। बलरामपुर और गोंडा के इलाके में राजपूत समुदाय के बीच उनका अच्छा नाम था। नवाबगंज मार्केट में तिराहे पर उनकी गद्दी थी। अनाज वगैरह का व्यापार था। वहां उनका अच्छा व्यवसाय था और इससे जो पूंजी मिलती थी उसमें से एक हिस्सा वह पंडित सिंह के बड़े भाई रविंदर को देते थे। बृजभूषण के पास उस वक्त पूंजी नहीं थी तो रविंदर उन्हें पूंजी देते थे। फैजाबाद में बस्ती के किंकर सिंह और इन लोगों को बीच किसी टेंडर को लेकर फायरिंग हुई थी। इसी दौरान गोली लगने से रविंदर सिंह की मौत हो गई थी। जब रविंदर सिंह नहीं रह गए तो कुछ दिन बाद पंडित सिंह से बृजभूषण सिंह की किसी लेन-देन को लेकर दूरी हो गई।' गोली लगी और हेलिकॉप्टर से लखनऊ लाए गए पंडित सिंह अब पंडित और बृजभूषण सिंह के बीच दूरी बढ़ती गई। वरिष्ठ पत्रकार टीपी सिंह कहते हैं, 'डुमरियाडीह में कोई मीटिंग थी। वहां पर बृजभूषण सिंह के साथ कुछ लोगों ने अभद्रता कर दी। इसके बाद 90 के दशक में दोनों की अदावत चरम पर पहुंच गई। पंडित सिंह का बल्लीपुर में गांव है। गांव के बाहर ही इनका घर है। 28 साल पहले की बात है। अपने बरामदे में वह बैठे हुए थे। इसी दौरान उन पर गोली चल गई।' जब मुलायम सिंह को इस घटना की जानकारी हुई थी तो उन्होंने हेलिकॉप्टर भेजा और एयरलिफ्ट करके पंडित सिंह को लखनऊ इलाज के लिए लाया गया। पंडित सिंह के दो भाई महेश और नरेंद्र सिंह अभी हैं। 1993 में पंडित सिंह पर हुए इस जानलेवा हमले के मामले में हाल ही में एमपी एमएलए कोर्ट में नरेंद्र सिंह ने गवाही दी है। इस मामले में कैसरगंज सांसद और भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह आरोपी हैं। 1991 में राजा आनंद सिंह को बृजभूषण ने दी शिकस्त पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह के बीच प्रतिद्वंद्विता की कई घटनाओं के गवाह रहे वरिष्ठ पत्रकार एसपी मिश्रा कहते हैं, 'बृजभूषण शरण सिंह का नवाबगंज के पास विश्नोहरपुर गांव है। एक दौर में मनकापुर स्टेट के राजा आनंद सिंह का जिले की राजनीति पर दबदबा था। शुरुआत में बृजभूषण सिंह उनके साथ थे। बृजभूषण के गांव विश्नोहरपुर के पास पंडित सिंह का बल्लीपुर गांव है। दोनों लोग साथ में छोटे-मोटे ठेके-पट्टे लेने लगे। आनंद सिंह के साथ रहते-रहते बृजभूषण सिंह में राजनीतिक आकांक्षा जगी तो एमएलसी का चुनाव लड़ा। उस समय बलरामपुर जिला गोंडा में ही आता था। बलरामपुर से कई बार विधायक रह चुके मान बहादुर सिंह ने बृजभूषण सिंह को इस चुनाव में हरा दिया। 1991 में बीजेपी के टिकट से कांग्रेस नेता आनंद सिंह के खिलाफ गोंडा से चुनाव लड़कर पहली बार बृजभूषण सिंह सांसद बने। इसके बाद इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी दौरान पंडित सिंह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा जागृत हुई और वह सपा में आए। दोनों नेताओं की अलग-अलग प्रतिद्वंद्विता राजा आनंद सिंह से भी चलती रही।' 1996 में पहली बार विधायक बने पंडित, फिर चढ़ता गया सितारा वरिष्ठ पत्रकार एसपी मिश्रा आगे बतते हैं, 'पहले दोनों साथ-साथ थे। फिर मनमुटाव हुआ, इसके बाद मनमुटाव धीरे-धीरे विरोध में बदला और विरोध धीरे-धीरे दुश्मनी में बदलता चला गया। 1993 का नवंबर-दिसंबर का महीना था जब पंडित सिंह पर उनके गांव बल्लीपुर स्थित आवास पर गोली चली। गोलियों की बौछार हुई। उस समय मुलायम सिंह सूबे के सीएम थे। 1996 में पंडित सिंह भी सपा से एमएलए हो गए। 2002 में फिर सपा से ही गोंडा सदर सीट से दूसरी बार विधायक बने। 2007 में बसपा के मोहम्मद जलील खां से हार गए। 2012 में फिर गोंडा से जीते। प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री, राजस्व राज्यमंत्री, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री और फिर कृषि मंत्री (कैबिनेट) भी बनाए गए। 1993 में पंडित सिंह पर जो फायरिंग का मामला था, उसमें उनके छोटे भाई नरेंद्र सिंह गवाह थे। दोनों परिवारों में फिर तीखापन आ गया है। नरेंद्र ने कोर्ट में गवाही दी और बृजभूषण सिंह से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है। इटियाथोक ब्लॉक में एक गांव है नारे महरीपुर। वहां भी दोनों के समर्थकों के बीच 90 के दशक में गोलियां चली थीं। गोंडा में जनता का एक वर्ग मानता है कि दोनों के बीच दुश्मनी अभी है। वहीं एक वर्ग यह भी मानता है कि जब मौका मिलता है तो दोनों एक हो जाते हैं।' जब मोदी लहर में पंडित और बृजभूषण की हुई टक्कर 2014 की मोदी लहर में कैसरगंज लोकसभा सीट पर बृजभूषण सिंह के खिलाफ पंडित सिंह सपा के टिकट से चुनाव लड़े थे। एक समय पंडित सिंह ने बृजभूषण सिंह पर शुरुआती दौर की काउंटिंग में बढ़त बना ली। कहते हैं कि उनके समर्थक लड्डू भी बनवाने लगे थे। पंडित को तीन लाख से ज्यादा वोट हासिल हुए थे लेकिन इसके बावजूद वह चुनाव हार गए थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में पंडित सिंह तरबगंज से लड़े जबकि उनके भतीजे सूरज सिंह गोंडा सदर सीट से उतरे। हालांकि बीजेपी के प्रेम नारायण तिवारी से पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण से सूरज चुनाव हार गए। 2019 का लोकसभा चुनाव भी पंडित सिंह ने सपा के टिकट पर लड़ा लेकिन बीजेपी के कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया (आनंद सिंह) से शिकस्त मिली।
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मंत्री बनने पर छुए पैर, अर्थी को कंधा...पंडित सिंह और बृजभूषण सिंह की दोस्ती-दुश्मनी, पूरी कहानी
Reviewed by Fast True News
on
December 26, 2021
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