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अपनी निगरानी में पेगासस जासूसी कांड की एसआईटी जांच कराने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार

नई दिल्लीपेगासस जासूसी केस देश के सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है। देश की सर्वोच्च अदालत से गुहार लगाई गई है कि वो इस जासूसी कांड की अपनी निगरानी में एसआईटी जांच करवाए। वकील एमएल शर्मा ने शीर्ष न्यायालय में अर्जी दाखिल कर कहा है कि जासूसी कांड ने भारतीय लोकतंत्र पर हमला किया है। उन्होंने दावा किया कि देश की सुरक्षा और न्यायपालिका की स्वतंत्रा का मुद्दा इसमें शामिल है। संविधान और दंड संहिता की धाराओं का हवाला याचिका में कहा गया है कि पेगासस कांड गहरी चिंता का विषय है और यह भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर गंभीर हमला है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह 'व्यापक स्तर और बिना किसी जवाबदेही' के निगरानी करना नैतिक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि स्पाइवेयर का उपयोग व्यापक तौर पर किया गया है। याची ने पूछा कि केंद्र सरकार ने अगर पेगासस स्पाइवेयर खरीदा है तो क्या यह अनुच्छेद 266 (3), 267 (2) और 283 (2) का उल्लंघन नहीं है? क्या आईपीसी की धारा 408, 409 और 120बी का मामला नहीं बनता है? जासूसी करना मानवाधिकार का उल्लंघन याची ने कहा है कि सर्विलांस तकनीक का इस्तेमाल व्यापक तरीके से हो रहा है और यह वैश्विक सुरक्षा और मानवाधिकार का मसला। इसका दुनियाभर में असर हुआ है। पेगासस न सिर्फ सर्वालांस टूल है बल्कि यह एक साइबर हथियार है। अगर जासूसी कानूनी तौर पर सही भी है तो भी ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसमें कहा गया है, 'पेगासस केवल निगरानी उपकरण नहीं है। यह एक साइबर-हथियार है जिसे भारतीय सरकारी तंत्र के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। भले ही यह आधिकारिक हो (जिसे लेकर संशय है), लेकिन पेगासस का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है।' याचिकाकर्ता की यह भी दलील याचिकाकर्ता एमएल शर्मा ने कहा, 'निजता कुछ छिपाने की इच्छा नहीं होती। यह स्वयं की ऐसी जगह होती है, जहां हमारे विचार एवं हमारा अस्तित्व किसी ओर के उद्देश्यों के साधन नहीं होते हैं। यह गरिमा के लिए आवश्यक तत्व है।' याचिका में कहा गया है कि पेगासस का उपयोग केवल बातचीत सुनने के लिए नहीं होता, बल्कि इसके उपयोग से व्यक्ति के जीवन के बारे में पूरी डिजिटल जानकारी हासिल कर ली जाती है और इससे ना केवल फोन का मालिक असहाय हो जाता है, बल्कि उसकी संपर्क सूची में शामिल हर व्यक्ति ऐसा महसूस करता है। निशाने पर आ चुके हैं 50 हजार लोग? जनहित याचिका में दावा किया गया है कि ऐसा बताया जा रहा है कि एनएसओ ग्रुप कंपनी के ग्राहकों ने 2016 के बाद से करीब 50 हजार फोन नंबर को निशाना बनाया है। अर्जी में कहा गया है कि की निगरानी में एसआईटी का गठन करने का निर्देश जारी किया जाए। पेगासस स्कैंडल की छानबीन की जाए और जिसने भी पेगासस स्पाइवेयर खरीदे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। एसआईटी के गठन की मांग याचिका में अनुरोध किया गया है कि इस कांड की जांच और राजनीतिक हित साधने के लिए 2017 के बाद से जजों, विपक्ष के नेताओं, राजनीतिक लोगों, कार्यकर्ताओं, सलाहकारों और अन्य की कथित जासूसी करने एवं पेगासस खरीदने वाले मंत्रियों और सभी आरोपियों के खिलाफ जांच करने और अभियोग चलाने के लिए शीर्ष अदालत की निगरानी में एसआईटी का गठन किया जाए। याचिका में जासूसी के लिए पेगासस को खरीदने को अवैध एवं असंवैधानिक करार देने का अनुरोध किया गया है। (न्यूज एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)


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अपनी निगरानी में पेगासस जासूसी कांड की एसआईटी जांच कराने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार अपनी निगरानी में पेगासस जासूसी कांड की एसआईटी जांच कराने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार Reviewed by Fast True News on July 22, 2021 Rating: 5

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