पॉक्सो: अलग कोर्ट का आदेश SC ने इसलिए दिया
नई दिल्ली ने बच्चों के साथ होनेवाले रेप के मामलों की सुनवाई के लिए अलग से कोर्ट गठन का निर्देश दिया है। सर्वोच्च अदालत ने 60 दिनों के अंदर जिलों में विशेष कोर्ट गठन की समयसीमा तय की गई है। संरक्षण कानून (POCSO) के संबंध में दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। विशेष कोर्ट गठन की क्यों पड़ी है जरूरत कानून के अनुसार बाल यौन शोषण से जुड़े मामलों में केस की सुनवाई के लिए 1 साल की समयसीमा तय की गई है। कोर्ट की कम संख्या को देखते हुए तय समयसीमा में केस पर फैसला लगभग असंभव है। बच्चों के साथ यौन शोषण संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित 670 कोर्ट में 1.5 लाख मामले लंबित हैं। इसका मतलब है कि एक जज के ऊपर 224 केस का दबाव है। इन 224 केस के अलावा हर जज के पास कई और मामले भी सुनवाई के लिए होते हैं। पढ़ें: केस सुनवाई की दर बहुत कम यौन शोषण के मामलों पर अगर नजर डाली जाए तो हर साल करीब 33000 पॉक्सो केस दर्ज किए जा रहे हैं। 2014 से 2018 के बीच इन केस में से सिर्फ 24% मामलों की ही सुनवाई पूरी हो सकी। पिछले 5 साल में पॉक्सो मामले में केस के लंबित होने की संख्या 15 गुना बढ़ गई है। सर्वोच्च अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि पॉक्सो केस में मिलनेवाले मुआवजे की 2015 में 3%, 2016 में 4% और 2017 में 5% तक ही रहा। कई राज्यों में स्थिति बेहद चिंताजनक केरल में बाल यौन शोषण के लिए कोर्ट की हालत बेहद दयनीय है। 2,211 केस की सुनवाई के लिए सिर्फ 3 कोर्ट का गठन है। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक पॉक्सो कोर्ट के पास 592 केस हैं। महाराष्ट्र में प्रत्येक पॉक्सो कोर्ट के पास 555, तेलंगाना में 492 और दिल्ली में 383 केस हैं। छत्तीसगढ़ और पंजाब में यह आंकड़ा अपेक्षाकृत कम है। इन दोनों राज्यों में पॉक्सो कोर्ट में 51 केस हैं। ओडिशा-महाराष्ट्र में केस सुनवाई पूरी होने की दर कम देश के कुछ राज्य ऐसे हैं जहां इन मामलों की सुनवाई की दर बेहद कम है। ओडिशा में यह दर 12%, महाराष्ट्र 14% भर है। दिल्ली में यह आंकड़ा 15% है और पूरे देश का औसत 24% के करीब है। पूर्वोत्तर के राज्यों में इन केस की सुनवाई पूरी होने की संख्या अपेक्षाकृत अच्छी है। मिजोरम में (52%), मध्य प्रदेश में (36%), सिक्किम (39%), गोवा (31%) और असम (30%) में है।
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पॉक्सो: अलग कोर्ट का आदेश SC ने इसलिए दिया
Reviewed by Fast True News
on
July 26, 2019
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