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Opinion: 'समाज के कमजोर तबकों का दर्द सामने रखने का काम तो RSS इससे पहले भी करता रहा है'

आर्थिक विकास और सामाजिक समरसता- ये दोनों बड़े मुद्दे हैं। अवसरों के बिना विकास नहीं होता और विकास के बिना समता नहीं आती। इसके आगे का शब्द है समरसता- सब में आत्मीय भाव हो, कोई ऊंचा-नीचा न रहे, भेदभाव न रहे, सब साथ चलें। संघ की लगभग यही विचारधारा है। सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने हाल के अपने वक्तव्यों में इसी बात को अधिक विस्तार दिया है।

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Opinion: 'समाज के कमजोर तबकों का दर्द सामने रखने का काम तो RSS इससे पहले भी करता रहा है' Opinion: 'समाज के कमजोर तबकों का दर्द सामने रखने का काम तो RSS इससे पहले भी करता रहा है' Reviewed by Fast True News on October 06, 2022 Rating: 5

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