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बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्यों मची है 'योगी' बनने की होड़?

पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने यहां यूपी जैसा कानून बनाकर प्रभावी कर दिया, जिसके तहत दंगे या अन्य किसी भी तरह के आंदोलन के दौरान अगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो नुकसान करने वाले की पहचान कर उससे उस नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक कृत्य के लिए जो सजा न्यायालय तय करेगा, वह अलग से होगी। यूपी जैसे जिस कानून को मध्य प्रदेश ने अपने यहां भी आजमाने का फैसला किया है, वह यूपी में इसी साल लागू किया गया है। मध्य प्रदेश से पहले हरियाणा सरकार भी योगी सरकार के इस कानून को अपने यहां 'कॉपी' कर चुकी है।

ऐसा क्या है कि योगी मॉडल को कामयाबी का जरिया मानकर उनके फॉर्म्युले को बीजेपी शासित दूसरे राज्य लागू करने की हड़बड़ी में रहते हैं और न सिर्फ बीजेपी शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री बल्कि यूपी में ही योगी बनने की होड़ लगी है..


बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों में क्यों मची है 'योगी' बनने की होड़?

पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने यहां यूपी जैसा कानून बनाकर प्रभावी कर दिया, जिसके तहत दंगे या अन्य किसी भी तरह के आंदोलन के दौरान अगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो नुकसान करने वाले की पहचान कर उससे उस नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक कृत्य के लिए जो सजा न्यायालय तय करेगा, वह अलग से होगी। यूपी जैसे जिस कानून को मध्य प्रदेश ने अपने यहां भी आजमाने का फैसला किया है, वह यूपी में इसी साल लागू किया गया है। मध्य प्रदेश से पहले हरियाणा सरकार भी योगी सरकार के इस कानून को अपने यहां 'कॉपी' कर चुकी है।



यूपी जैसा कानून बनाने और लागू करने का उतावलापन
यूपी जैसा कानून बनाने और लागू करने का उतावलापन

बीजेपी शासित दो अन्य राज्यों से भी इस तरह की खबरें आई हैं, वे भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से वसूली के लिए यूपी जैसा कानून बनाने पर विचार कर रहे हैं। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब बीजेपी शासित राज्यों में यूपी सरकार के बनाए कानून को अपने यहां भी बनाने और उसे लागू करने का उतावलापन देखा जा रहा हो। इससे पहले जब योगी सरकार ने शादी के लिए धर्मांतरण को रोकने का कानून बनाया, जिसे आम बोलचाल की भाषा में लव जिहाद के खिलाफ कानून का नाम मिला, उस कानून को भी कई राज्यों ने 'कॉपी' किया, जिसमें गुजरात, उत्तराखंड, हरियाणा, असम शामिल हैं। गोवंश हत्या को रोकने के लिए यूपी के सरकार के कानून के कई प्रावधान भी दूसरे राज्यों को भाए और उन्होंने अपने यहां उसे शामिल किया।



​योगी को 'फॉलो' करने की वजह
​योगी को 'फॉलो' करने की वजह

2017 में सत्ता में आने के बाद योगी ने इन कानूनों के जरिए सख्त प्रशासन की अपनी छवि तो बनाई ही, साथ ही वह हिंदुत्व के ताकतवर 'ब्रैंड' बन कर उभरे। जनधारणा यह बनी कि योगी ने जो कानून बनाए वे कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से तो महत्वपूर्ण हैं ही, उनसे कहीं न कहीं हिंदू धर्म की 'रक्षा' का भी संदेश गया। भारतीय राजनीति का पिछले कुछ वर्षों के दरमियान जो मिजाज बदला है, उसमें 'हिंदुत्व' एक अहम फैक्टर बन गया और किसी भी राजनीतिक दल के लिए उसे नकार पाना संभव ही नहीं है। ढाई दशक के अंतराल के बाद 2017 में यूपी में जब बीजेपी ने सत्ता में वापसी की (हालांकि बीच में दो बार बीएसपी के साथ गठबंधन सरकार का हिस्सा रही लेकिन पूर्ण बहुमत उसे 1992 के बाद ही मिला) तो उसमें पार्टी के तमाम स्थापित चेहरों को नजरअंदाज करते हुए अगर योगी आदित्यनाथ का चयन मुख्यमंत्री पद के लिए हुआ था तो उसकी वजह भारतीय राजनीति के मिजाज में आए इस बदलाव की वजह से हुआ था। वर्ना योगी आदित्यनाथ कभी भी बीजेपी की मुख्यधारा की राजनीति के हिस्सेदार नहीं रहे। वह हिंदू युवा वाहिनी के जरिए पूर्वांचल के कुछ खास जिलों तक ही सीमित थे लेकिन वह 'फायरब्रांड' हिंदू नेता के रूप में जाने जाते थे।



​'योगी मॉडल' यानी कामयाबी का फॉर्म्युला
​'योगी मॉडल' यानी कामयाबी का फॉर्म्युला

2017 में योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जिन-जिन राज्यों में चुनाव हुए पार्टी ने स्टार प्रचारक के रूप में आगे किया और उनकी सरकार के फैसलों को 'योगी मॉडल' के रूप में स्थापित किया। दरअसल बीजेपी शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लगता है कि 'योगी मॉडल' कामयाबी का जरिया बन सकता है। योगी के जैसे फैसलों को अपने राज्य में लागू कराकर वे भी 'हिंदुत्व' के 'ध्वजवाहक' बन सकते हैं।



​बीजेपी के अंदर भी 'योगी' बनने की होड़
​बीजेपी के अंदर भी 'योगी' बनने की होड़

बात सिर्फ बीजेपी शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के 'योगी' बनने की होड़ तक सीमित नहीं है, देखा जाए तो यूपी में बीजेपी के अंदर भी 'योगी' बनने की होड़ शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री पद के दावेदार पार्टी के कई नेताओं को यह लगता है कि योगी उनसे इसलिए आगे हैं कि हिंदुत्व के प्रति उनका जो खुलापन है, वह उन्हें आगे किए हुए है तो उन्हें भी वैसे ही तेवर दिखाने चाहिए। पिछले दिनों पहले मथुरा और उसके बाद 'जालीदार टोपी' और 'लुंगी' को लेकर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का जो बयान आया, उसे भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। 2017 के चुनाव के वक्त पार्टी ने जब लक्ष्मीकांत वाजपेयी को हटाकर केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था तो यह माना गया कि वे ही सीएम पद का चेहरा हैं लेकिन अंतिम समय में योगी ने उनसे बाजी मार ली। 2022 में भी योगी उनसे आगे दिख रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य अब तक महज ओबीसी वर्ग के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं लेकिन अब फायरब्रांड हिंदू नेता बनना चाहते हैं।





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बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्यों मची है 'योगी' बनने की होड़? बीजेपी के मुख्यमंत्रियों में क्यों मची है 'योगी' बनने की होड़? Reviewed by Fast True News on December 26, 2021 Rating: 5

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