चार दिवसीय दौरे पर दिल्ली आ रहीं ममता, कितनी सफल हो पाएगी बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी की कवायद?
नई दिल्ली/कोलकाता राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की जुगत वक्त-वक्त पर होती रहती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी सिलसिले को बढ़ाने चार दिन की दिल्ली दौरे पर आ रही हैं। बीजेपी के खिलाफ खेमेबंदी में अपनी पूरी ताकत झोंकने वो आज दिल्ली पहुंच जाएंगी। उनका विपक्ष के कई नेताओं के साथ मीटिंग का कार्यक्रम है जिनमें बीजेपी के खिलाफ एक ताकतवर मोर्चे की संभावना टटोली जाएगी। ममता का 28 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का कार्यक्रम है। पिछले आम चुनाव से पहले भी हुई थी कवायद 'दीदी' की ताजा कवायद के मद्देनजर यह सवाल महत्वपूर्ण है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उनके बुलावे पर कोलकाता में कई विपक्षी नेताओं के जुटान का क्या नतीजा निकला था? याद रहे कि तब कांग्रेस भी मंच पर थी, लेकिन दो साल बाद ही प. बंगाल के विधानसभा चुनाव के मैदान में उसने ममता की तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग ताल ठोंक दी थी। यह अलग बात है कि कांग्रेस को प. बंगाल में एक भी सीट नहीं मिल पाई। कांग्रेस-टीएमसी के बीच फिर पक रही खिचड़ी फिर भी कांग्रेस-टीएमसी के बीच नए सिरे से खिचड़ी पकती दिख रही है। रविवार को कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पेगासस जासूसी कांड के मुद्दे पर किए एग ट्वीट में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और 'दीदी' के भतीजे अभिषेक बनर्जी की तस्वीर भी देखी जा सकती है। कांग्रेस ने इस ट्वीट में कहा है कि अभिषेक को कैसे बंगाल चुनावों के कारण टारेग किया गया था। टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इस ट्वीट पर कॉमेंट में लिखा, 'खेला होबे।' दिल्ली दौरे पर आ रहीं ममता बनर्जी की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की खबरों के बीच यह कवायद कुछ कह रही है? जवाब है- हां। भविष्य का खाका खींचने में जुटीं ममता याद कीजिए, 18 जुलाई को सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस पार्टी ने टीएमसी का कई मुद्दों पर साथ दिया था जिनमें पार्टी में विभाजन के लेकर संविधान की 10वीं अनुसूचि का मुद्दा भी एक था। उससे पहले विधानसभा चुनाव में टीएमसी के रणनीतिकार की भूमिका निभा चुके प्रशांत किशोर दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मिल चुके थे। फिर 21 जुलाई को कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम और दिग्विजय सिंह दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित टीएमसी की रैली में शामिल हुए। उस मीटिंग में उन्होंने कहा कि सर्दियों में कोलकाता के ब्रिगेड पैरेड ग्राउंड में वो विपक्षी दलों की एक विशाल रैली करेंगी जिनमें सोनिया गांधी को बुलाया जाएगा। 2024 आम चुनाव की तैयारी बहरहाल, ममता चाहती हैं 2019 की गलती नहीं दोहराई जाए और आम चुनाव से ठीक पहले विपक्षी एकता की कवायद का यूं ही दिखावा नहीं हो बल्कि इस बार सभी पक्षों को पर्याप्त समय मिले ताकि लोकसभा चुनाव आने से पहले तीन साल में विपक्षी गठबंधन प्रभावी तौर पर आकार ले सके। ममता इस बार शिव सेना और शिरोमणि अकाली दल (SAD) नेताओं से भी मिल सकती हैं। ये दोनों दल कभी बीजेपी नीत राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा हुआ करती थीं। इन दोनों दलों ने 21 जुलाई की कॉन्स्टिट्यूशन क्लब वाली रैली में भी हिस्सा लिया था।
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चार दिवसीय दौरे पर दिल्ली आ रहीं ममता, कितनी सफल हो पाएगी बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी की कवायद?
Reviewed by Fast True News
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July 25, 2021
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