नए वेरिएंट से लड़ने लिए कम से कम हाई रिस्क वालों को तो लगाना होगा बूस्टर डोज
नई दिल्ली पिछले कुछ दिनों से बूस्टर डोज को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हाल ही में एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि इस साल के अंत तक बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। वहीं, अब इजरायल से भी एक स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस के नए वैरियंट्स से लड़ने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत महसूस हो रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम से कम उन लोगों को तो बूस्टर डोज की जरूरत है जो हाई रिस्क (कोमोर्बिडिटीज, बुजुर्ग, फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स) पर हैं। वैक्सीन कब तक प्रभावी, यह पता नहीं एम्स में कोविड आईसीयू मैनेज करने वाले और एनेस्थिसियोलॉजी व क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के असोसिएट प्रफेसर डॉ. युद्धवीर सिंह कहते हैं कि कई ऐसे डेटा सामने आ चुके हैं जिसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में बूस्टर डोज की आवश्यकता पड़ सकती है। कम से कम जो लोग हाई रिस्क पर हैं, उन्हें तो इसकी सख्त जरूरत पड़ सकती है। हमारे पास ऐसे ज्यादा सबूत नहीं हैं जिससे यह पता चल सके कि वैक्सीन कब तक प्रभावी रहेगी। हो सकता है कि यह 6 महीने तक प्रभावी रहे या हो सकता है कि एक साल तक प्रभावी रहे, लेकिन जब तक इस बाबत पर्याप्त सबूत नहीं होंगे, तब तक कुछ भी कहना मुश्किल है। ऐसे में बूस्टर डोज की जरूरत होगी, ताकि कोरोना के नए वैरियंट्स से लड़ा जा सके और लोगों में एंटीबॉडीज बनी रहें। लगातार आ रही है बूस्टर डोज पैरवी इजरायल समेत कई ऐसे देश हैं जिन्होंने हाल ही में वैक्सीन को लेकर स्टडी की हैं और उनमें सामने आया है कि वैक्सीन की बूस्टर डोज की आवश्यकता आने वाले समय में पड़ सकती है। डॉ. युद्धवीर सिंह का कहना है कि भले ही सेकंड वेव में एक बड़ी आबादी संक्रमित हुई है, फिर भी उससे ज्यादा लोग ऐसे हैं जो संक्रमण से बचे हुए हैं। कोविड प्रॉटोकॉल का रखना होगा ख्याल दिल्ली की बात करें तो दिल्ली में सेकंड वेव के दौरान जितनी संख्या संक्रमित हुई है, उसे देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि दिल्ली में हर्ड इम्युनिटी बन गई होगी लेकिन यहां सतर्क रहने की जरूरत है। लॉकडाउन या पाबंदियां हर वक्त लगाकर नहीं रखी जा सकतीं, क्योंकि इससे इकॉनमी पर असर पड़ता है। बाजारों, मॉल्स आदि को खोलना ही पड़ेगा, लेकिन दुकानदारों और बाहर निकलने वाले लोगों को खुद अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कोविड के उपयुक्त व्यवहार को फॉलो करना होगा ताकि दोबारा कोरोना वायरस के मामले ना बढ़ें। मामले बढ़ेंगे तो नुकसान सरकार से लेकर आम जनता तक सभी को होगा। नए वेरियेंट से बढ़ रहा खतरा बता दें कि दो दिन पहले ही एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी यह कहा था कि इस साल के अंत तक बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। जिस तरह से नए-नए वेरियंट आ रहे हैं, उसे देखते हुए यह जरूरी साबित होने वाली है। उन्होंने यह भी कहा था कि बूस्टर डोज एक अगला कदम होगा और यह तभी हो सकता है जब एक बड़ी आबादी को वैक्सीन की दोनों डोज लगा दी जाएं। साथ ही बच्चों की वैक्सीन को लेकर उन्होंने कहा था कि सितंबर तक बच्चों के लिए वैक्सीन आ सकती है। डरा रहा इजरायल का उदाहरण इजरायल में कोरोना वायरस के मामले जून के अंत से फिर से बढ़ रहे हैं और यहां अब रोजाना एक हजार के करीब केस आ रहे हैं। वह भी तब, जब इजरायल में वैक्सीनेशन की स्पीड काफी अच्छी और एक बड़ी आबादी को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि कोरोना वायरस होने से रोकने में जनवरी से अप्रैल के बीच फाइजर की वैक्सीन 95 प्रतिशत तक प्रभावी देखी गई थी, लेकिन जून के अंत और जुलाई की शुरुआत में यह केवल 39 प्रतिशत प्रभावी देखी गई है। हालांकि, दोनों ही स्थिति में गंभीर स्थिति होने से रोकने में वैक्सीन 90 प्रतिशत तक प्रभावी थी। उनका कहना है कि वैक्सीनेशन के बाद भी केस बढ़ रहे हैं। यहां तक की अमेरिका में भी मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में बूस्टर डोज की आवश्यकता हो सकती है।
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नए वेरिएंट से लड़ने लिए कम से कम हाई रिस्क वालों को तो लगाना होगा बूस्टर डोज
Reviewed by Fast True News
on
July 26, 2021
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