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Interview: 'लैटरल एंट्री में आरक्षण की अनदेखी न हो, जरूरत हुई तो पीएम से बात करूंगा'

से केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री स्तर के पदों को भरने की प्रक्रिया एक बार फिर से शुरू हुई है, साथ ही राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। विवाद की दो प्रमुख वजहें हैं। पहली यह कि इस तरह की भर्ती में कोई आरक्षण लागू नहीं है, और दूसरी यह कि जब सरकार डायरेक्ट इस तरह से भर्ती कर लेगी, तो संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिए जो युवा इस सेवा में आना चाहते हैं, उनके अवसर सीमित हो जाएंगे। एनबीटी के नैशनल पॉलिटिकल एडिटर नदीम ने रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष और मोदी सरकार में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले से बात करके जानने की कोशिश की कि क्या वाकई इससे आरक्षण को खतरा है, और युवाओं के लिए आईएएस संवर्ग में आने के अवसर सीमित हो जाएंगे? प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के मुख्य अंश : एक बार फिर से यह धारणा पुख्ता की जा रही है कि बीजेपी आरक्षण को खत्म करने के रास्ते पर चल रही है? यह समय-समय पर फैलाई जाने वाली अफवाह है। जब विपक्ष के पास कोई काम नहीं होता, तो वह शोर मचाने लगता है कि आरक्षण खत्म होने जा रहा है। मैं मोदी सरकार में मंत्री हूं और सरकार का हिस्सा होने के नाते दावे के साथ कह सकता हूं कि आरक्षण को खत्म करना किसी भी सरकार के लिए मुमकिन ही नहीं है। आप केंद्र सरकार का हिस्सा हैं, मोदी जी, शाह जी आपकी बात को सुनते भी हैं। आपकी एक पुरानी मांग है कि प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण होना चाहिए, लेकिन इस मांग पर अभी तक तो कुछ नहीं हुआ? मेरी यह मांग खत्म नहीं हुई है। सरकार में मंत्री होने के बावजूद मैं इस मांग के लिए दबाव बनाए हुए हूं। सोमवार को मेरी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग हुई थी। मीटिंग में भी प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग का प्रस्ताव पास हुआ। हमारी पार्टी प्रमोशन में भी आरक्षण की हिमायती है। हम चाहते हैं कि 2021 में जो जनगणना हो, वह जातीय आधार पर हो और उसके आंकड़े सार्वजनिक हों। आप प्राइवेट सेक्टर में तो आरक्षण की मांग कर रहे हैं, लेकिन आपकी सरकार लैटरल एंट्री की जरिए केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री स्तर के जिन पदों को भर रही है, उसमें कहीं आरक्षण नहीं लागू है। इसी वजह से इस प्रक्रिया पर विवाद खड़ा हो रहा है.. यह समझ लेना चाहिए कि लैटरल एंट्री के जरिए जो पद भरे जा रहे हैं वे स्थायी पद नहीं हैं। वह अस्थायी किस्म की तात्कालिक व्यवस्था है, ताकि खास फील्ड के एक्सपर्ट लोगों की क्षमता और अनुभव का लाभ उठाया जा सके। इससे न तो अवसर खत्म होंगे और न ही आरक्षण। विवाद की वजह तो यह है कि जब पद सरकारी हैं तो इन्हें भरने की प्रक्रिया में भी आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था लागू होनी चाहिए... मैं भी चाहूंगा कि इन पदों के योग्य आरक्षित वर्ग के जो लोग हों, उनकी नियुक्ति हो। उनकी अनदेखी न होने पाए और जरूरत महसूस होने पर प्रधानमंत्री जी से भी बात करूंगा। आरोप यह भी है कि लैटरल एंट्री के जरिए बीजेपी बैक डोर से एक खास विचारधारा के लोगों को उच्च प्रशासनिक पदों पर बिठा देना चाहती है। आप क्या कहेंगे इस पर? मैं इस आरोप से सहमत नहीं हूं। विचारधारा तो उस व्यक्ति के पास भी हो सकती है जो परीक्षा पास करके आएगा। इसका क्या पैमाना हो सकता है कि उसकी विचारधारा क्या है? सरकार के किसी भी पद पर जिस किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति होती है, उसे विचारधारा के आधार पर नहीं, नियमों में बंधकर काम करना होता है। आप 25 फरवरी से हर एक भूमिहीन परिवार को पांच एकड़ भूमि दिलाने के लिए अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इसकी जरूरत क्यों पड़ी? देश के अलग-अलग राज्यों में बहुत अधिक क्षेत्रफल में ऐसी सरकारी जमीनें पड़ी हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इसी के मद्देनजर मेरी मांग है कि अगर गरीबी को दूर करना है तो गांव में जो गरीब लोग हैं, जिनके पास रत्ती भर भी जमीन नहीं है और जो दूसरों के खेतों में काम करके गुजर-बसर करते हैं, उन्हें पांच-पांच एकड़ जमीन दे दी जाए। लेकिन आप तो सरकार हो, आंदोलन की जरूरत ही क्यों? कैबिनेट से निर्णय क्यों नहीं करा रहे? जमीनों का आवंटन केंद्र के हाथ नहीं होता, राज्य सरकारों के हाथ होता है। राज्यों में भी किसी एक दल की सरकार तो है नहीं। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों की सरकारें हैं। हमारे आंदोलन का मकसद इस मुद्दे पर सभी राज्य सरकारों का ध्यान खींचना और उन्हें अपनी मांग के लिए तैयार करना है। मुझे नहीं लगता कि राज्य सरकारों को इस पर कोई आपत्ति होगी, क्योंकि सभी अपने राज्यों में बीपीएल में जीवन जीने वाले लोगों को ऊपर उठाना चाहते हैं। पांच राज्यों के चुनाव होने जा रहे हैं। उसको लेकर आपने अपनी कुछ भूमिका तय की क्या? बंगाल और तमिलनाडु में हमारी पार्टी सीमित संख्या में चुनाव लड़ना चाहती है और वह भी बीजेपी के साथ मिलकर। बाकी सीटों और बाकी राज्यों में हमारी पार्टी बीजेपी को जिताने के काम में लगेगी। सीट शेयरिंग के मुद्दे पर अभी नड्डा जी से बात होनी है। महाराष्ट्र में क्या राजनीतिक परिदृश्य देख रहे हैं? महाराष्ट्र में जो यह तीन दलों की सरकार है, उन दलों में आपस में नहीं पट रही है। इसलिए सरकार कभी भी गिर सकती है। हम पहल करके सरकार को नहीं गिराने वाले हैं, लेकिन अगर सरकार गिरती है तो बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बनेगी। किसान आंदोलन पर आपका क्या नजरिया है? जो ये तीन कानून बने हैं, वे किसानों के हित में है। किसानों को कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं। किसानों को अपना हित खुद समझना चाहिए।


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Interview: 'लैटरल एंट्री में आरक्षण की अनदेखी न हो, जरूरत हुई तो पीएम से बात करूंगा' Interview: 'लैटरल एंट्री में आरक्षण की अनदेखी न हो, जरूरत हुई तो पीएम से बात करूंगा' Reviewed by Fast True News on February 10, 2021 Rating: 5

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