'मैं खालिस्तानी हूं' कहने वाला मो धालीवाल भारत के खिलाफ उगलता है जहर, जानें ग्रेटा की 'टूलकिट' के पीछे कौन
आईपी सिंह, चंडीगढ़ एक तरफ दिल्ली पुलिस ने क्लाइमेट ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट किए डॉक्युमेंट को लेकर जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, कनाडा में पैदा हुए एक सिख, मो धालीवाल का वीडियो भी सामने आया है। पुलिस इस वीडियो की भी जांच कर रही है। इस वीडियो की भाषा बेहद आपत्तिजनक है। इसमें धालीवाल कह रहा है, " अगर कल को कृषि कानून वापस ले लिए जाते हैं तो वह जीत नहीं। यह लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लिए जाने के साथ शुरू होगी, यह वहां खत्म नहीं होगी। किसी को यह बताने मत दीजिए कि ये लड़ाई कृषि कानूनों को वापस लेने के साथ खत्म हो जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि वे इस आंदोलन की ऊर्जा खत्म करना चाहते हैं। वे आपको बताना चाहते हैं कि आप पंजाब से अलग हो और आप खालिस्तान आंदोलन से अलग हो, आप नहीं हो।" हम इस वीडियो की सत्यता प्रमाणित नहीं कर सके हैं। कौन है मो धालीवाल?मो धालीवाल का जुड़ाव पोयटिक जस्टिस फाउंडेशन (PJF) से सामने आया है। इसी PJF पर शक है कि उसने वह टूलकिट तैयार की जो ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट की थी। अपनी एक फेसबुक पोस्ट में, धालीवाल ने कहा कि फाउंडेशन की स्थाना उसकी दोस्त अनिता लाल ने की थी। धालीवाल Skyrocket नाम की एक डिजिटल ब्रैंडिंग क्रिएटिव एजेंसी का को-फाउंडर और चीफ स्ट्रैटीजिस्ट भी है जिसकी नींव उसने वैंकूवर में साल 2011 में डाली थी। हाल के दिनों तक वह कनाडाई-सिख और पंजाबी सर्किल्स में अपनी आंत्रप्रेन्योरियल स्किल्स के लिए मशहूर था, न कि खालिस्तान के समर्थन या अपनी राजनीतिक राय के लिए। उसने वैंकूवर इंटरनैशनल भंगड़ा सेलिब्रेशन सोसायटी की स्थापना भी की थी। सिख मुद्दों या राजनीति की उसको कितनी समझ है, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि 2015 में सोसायटी ने भंगड़ा फेस्टिवल जून के पहले हफ्ते में आयोजित कराने की घोषणा की जो संयोग से ऑपरेशनल ब्लूस्टार की बरसी पर था। कनाडाई सिखों के हंगामे के बाद उसकी संस्था ने माफी मांगी, वह भी अनिता लाल के जरिए। सिख सर्किल्स में पता करने पर यह सामने आया कि इस घटना के बाद से, धालीवाल ने सिख मुद्दों को ध्यान से पढ़ना शुरू किया। खुद को बताता है 'खालिस्तानी'17 सितंबर 2020 को अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में धालीवाल लिखता है, "मैं एक खालिस्तानी हूं। आप शायद मेरे बारे में यह नहीं जानते होंगे। क्यों? क्योंकि खालिस्ताान एक विचार है। खालिस्तान एक जीता-जागता, सांस लेता आंदोलन है।" पोस्ट में उसने यह भी लिखा कि वह 1984 में छह साल का था। 3 जून, 2020 को उसने जरनैल सिंह भिंडरावाले की एक फोटो पोस्ट की और साथ में लिखा, "गुलामी से आजादी तभी मिलती है जब कोई यह समझना और महसूस करना शुरू करता है कि वह एक गुलाम की जिंदगी के बजाय मौत पसंद करेगा।" अपने फेसबुक पेज पर धालीवाल ने कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के सदस्य जगमीत सिंह धालीवाल के साथ तस्वीरें पोस्ट की हैं। जगमीत का गांव पंजाब के बरनाला जिले के टिकरीवाल गांव में हैं। उनके गांव में संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं मिला। दशकों से टिकरीवाल में रह रहे गुरदयाल सिंह ने कहा, "हमने कभी मो धालीवाल के बारे में सुना नहीं। हम जगमीत को जानते हैं। हमें नहीं पता कि जगमीत की मो के साथ फोटोज मिली हैं।" पंजाब के किसान संगठनों ने भी इस बात से इनकार किया कि उन्होंने मो के बारे में कभी सुना है।
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'मैं खालिस्तानी हूं' कहने वाला मो धालीवाल भारत के खिलाफ उगलता है जहर, जानें ग्रेटा की 'टूलकिट' के पीछे कौन
Reviewed by Fast True News
on
February 05, 2021
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