Jammu-Kashmir News: तीन तरफ से पाकिस्तान की गोलाबारी झेल रहा तंगधार
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तंगधार (लाइन ऑफ कंट्रोल) तंगधार की करीब 61 हजार की आबादी इस डर में जीती है कि पता नहीं कब पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी हो जाए और कब उन्हें जान-माल का नुकसान उठाना पड़े। तंगधार की भौगोलिक स्थिति इस तरह से है कि तीन तरफ से पाकिस्तान गोले बरसा सकता है। यहां साल 2002 तक सीज फायर का बहुत ज्यादा उल्लंघन होता था लेकिन फिर कुछ सालों के लिए गोलाबारी बंद हुई। अब पिछले साल से फिर से इस इलाके में पाकिस्तान सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है। इसी साल जुलाई महीने में पाकिस्तान की गोलाबारी में 2 सिविलियंस की मौत हो गई और एक घायल हुआ। इस महीने के अंत तक 120 कम्युनिटी बंकर तैयार लाइन ऑफ कंट्रोल के पास वाले गांवों में गृह मंत्रालय की तरफ से कम्युनिटी बंकर बनाए जा रहे हैं। तंगधार में भी इस पर काम हो रहा है। यहां के एसडीएम बिलाल बट ने बताया कि 60 कम्युनिटी बंकर का अप्रूवल आया था। वह बड़े साइज के थे तो हमने यहां की जरूरत के हिसाब से उसे साइज में आधा करके 120 बंकर बनाने का फैसला किया। 120 बंकर पर काम चल रहा है जिसमें से 75 बंकर पूरी तरह तैयार हैं। इस महीने के आखिर तक सारे बंकर बन जाएंगे। एक बंकर में 50-60 लोग रह सकते हैं। एक बंकर बनाने का खर्च करीब 10 लाख रुपये आ रहा है। पहले यहां लोगों ने इंडिविजुवल बंकर बनाए हुए थे। लेकिन 2002 के बाद जब सीज फायर का उल्लंघन ना के बराबर होने लगा तो लोगों ने इन बंकरों को स्टोरेज या सेपटिक टैंक में तब्दील कर दिया। अब फिर पाकिस्तान गोले बरसा रहा है तो बंकर की जरूरत आन पड़ी है। फायरिंग शुरू होने पर कैसे पहुंचें बंकर तक तंगधार का सुदपुरा गांव एकदम एलओसी के पास है। गांव के सरपंच खलीलुल रहमान कहते हैं कि कम्युनिटी बंकर तो ठीक हैं लेकिन लोगों की और मवेशी की जान बचाने के लिए इंडिविजुवल बंकर की जरूरत है। वह कहते हैं कि जब फायरिंग शुरू होती है तो वह पांच मिनट का मौका भी नहीं देती तो फिर कैसे 20-25 मिनट दूर जाकर कम्युनिटी बंकर में पहुंचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि गांव में जो पैसे वाले लोग हैं उन्होंने इंडिविजुवल बंकर बना रखे हैं लेकिन ऐसे लोगों की संख्या 2 पर्सेंट ही है। फायरिंग शुरू और पानी बंद सुदपुरा गांव सहित करीब 6 गांव पानी के लिए भी पीओके से आ रही नहर पर निर्भर हैं। पाकिस्तान की तरफ से जब गोलाबारी होती है तो पानी बंद हो जाता है। खलीलुल रहमान ने बताया कि हम लोग साल में एक बार सफेद झंडा लेकर जाते हैं और पाकिस्तान वालों को पानी की कीमत चुकाते हैं। कभी 50 हजार कभी 60-70 हजार रुपये। यह पूरे साल के लिए होती है। अगले साल फिर नया अग्रीमेंट होता है। नहर के जरिए जो पानी आता है उसे ही हम पीते हैं और उसी का खेती में भी इस्तेमाल होता है। लेकिन पाकिस्तान बीच बीच में बहाना बनाकर पानी बंद कर देता है। कभी मौसम का बहाना तो कभी गोलीबारी का। उन्होंने बताया कि सुदपुरा गांव तीन हिस्सों में है। एक एलओसी की फेंस के पीछे, एक हिस्सा फेंस से आगे और एक हिस्सा पीओके में है।
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Jammu-Kashmir News: तीन तरफ से पाकिस्तान की गोलाबारी झेल रहा तंगधार
Reviewed by Fast True News
on
October 21, 2020
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