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पिता, पिछलग्गू... PK ने नीतीश को खूब सुनाया

पटना चुनावी रणनीतिकार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से बर्खास्त होने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए तो मुख्यमंत्री और उनकी सरकार के कामकाज पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने नीतीश को पिछलग्गू कहा तो 'गुजरात वाला' कहकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर भी प्रहार किया। प्रशांत ने नीतीश को हारे हुए नेता बताते हुए बीजेपी-जेडीयू गठबंधन पर भी सवाल उठाए और कहा कि गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते। नीतीश ने विकास किया लेकिन मामूली जेडीयू के पूर्व उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही नीतीश कुमार को पितातुल्य बताया। उन्होंने कहा कि वह नीतीश के हर फैसले को सहृदय स्वीकार करते हैं। उस पर कोई टीका-टिप्पणी न अब करेंगे और न भविष्य में। हालांकि, अगले ही पल उन्होंने नीतीश को बहुत कुछ सुना दिया। उन्होंने नीति आयोग की ओर से निर्धारित डिवेलपमेंट इंडेक्स के हवाले से बिहार को फिसड्डी करार दिया और कहा कि नीतीश ने 15 सालों में विकास तो किया, उनके विकास कार्य लोगों के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाले नहीं रहे। प्रशांत किशोर ने 'बात बिहार की' नाम से कैंपेन की शुरू करने का ऐलान किया। 'जेडीयू से निकाले जाने का मैं स्वागत करता हूं' पटना में प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'नीतीश जी से मेरा संबंध विशुद्ध राजनीतिक नहीं रहा है। दिसंबर 2014 में पहली बार मिले थे, जिस तरह से नीतीश जी ने साथ रखा, वह किसी बेटे की तरह ही रखा, उन्होंने उसी तरह स्नेह दिया। जब मैं उनके दल में था, तब भी और उससे पहले भी, मैंने भी उन्हें पितातुल्य माना।' उन्होंने कहा, 'नीतीश ने जो भी फैसला लिया, उनके सारे फैसले को सहृदय स्वीकार करता हूं। कोई विवाद टीका-टिप्पणी न ही अभी, न ही आगे। यह उनका एकाधिकार था, आगे भी रहेगा। इस बात के लिए सम्मान है उनके प्रति सम्मान जो है वह आगे भी रहेगा।' 'गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते'प्रशांत किशोर ने जेडीयू और बीजेपी के गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कि गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते हैं। 15 साल में बिहार में खूब विकास हुआ है, लेकिन विकास की रफ्तार और आयाम ऐसे नहीं रहे हैं, जिससे बिहार की स्थिति बदली हो। नीतीश से मतभेद के ये दो कारणप्रशांत किशोर ने बताया कि नीतीश और उनके बीच दो वैचारिक मतभेद हैं। उन्होंने कहा, 'पहला कारण वैचारिक है। जितना मैं नीतीश जी को जानता हूं वह हमेशा गांधी, जेपी और लोहिया को नहीं छोड़ सकते हैं। मेरे मन में दुविधा यह है कि आप गांधी जी की बातों का शिलापट लगवा रहे हैं, यहां के लोगों को गांधी के विचारों से अवगत करा रहे हैं। उस समय गोडसे के साथ खड़े लोग उनके साथ भी कैसे खड़े हो सकते हैं। दोनों बातें एक साथ नहीं हो सकती है। दूसरे बीजेपी और जेडीयू में गठबंधन में उनकी स्थिति को लेकर है। 2004 की तुलना में आज गठबंधन में उनकी स्थिति दयनीय है।' 'क्या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला?' प्रशांत किशोर ने कहा, 'आपके झुकने से भी बिहार का विकास हो रहा है, तो मुझे आपत्ति नहीं है। क्या इस गठबंधन के साथ रहने से बिहार का विकास हो रहा है, सवाल यह है। लेकिन इतने समझौते के बाद भी बिहार में इतनी तरक्की हो गई है? क्या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला?' उन्होंने आगे कहा, 'नीतीश ने बिहार यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए सबके सामने हाथ जोड़े थे लेकिन उस पर बात करना तो दूर कोई रिप्लाइ तक नहीं किया।' प्रशांत किशोर ने कहा, 'हम ऐसा नेता चाहते हैं जो सशक्त हो बिहार के लिए अपनी बात कहने में किसी का पिछलग्गू न बने।' नीतीश पर सवाल उठाते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वह बिहार को गरीब राज्य क्यों दिखाना चाहते हैं? प्रशांत किशोर ने कहा, नीतीश का विचार है कि हम पुरानी पार्टी है, ट्विटर का क्या करेंगे? मेरी सोच इससे अलग है। ट्विटर अकेले गुजरात वालों का नहीं है। गुजरात को ट्विटर हमने ही सिखाया है।'प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी के साथ नीतीश कुमार के रहने से बिहार का विकास कम हुआ। उन्होंने कहा, '15 साल में बिहार में खूब विकास हुआ लेकिन विकास की गति धीमी है। 2005 में जो बिहार की स्थिति थी, आज भी वही स्थिति है। कैपिटल इनकम में बिहार 2005 में भी 22वें नंबर पर था, आज भी उसी नंबर पर है।' प्रशांत किशोर ने कहा कि पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया, इसलिए नीतीश जी को लगता है कि जो किया बहुत किया। मैं इसलिए नहीं बैठा हूं कि कोई राजनीतिक दल बनाकर चुनाव लडूं। बिहार में मैं चुनाव लड़ने और लड़ाने के लिए नहीं आया हूं। मैं जब तक जिंदा हूं, बिहार की सेवा करूंगा। प्रशांत किशोर करेंगे 'बात बिहार की'प्रशांत किशोर ने आगे कहा, 'मैं यहां किसी राजनीतिक पार्टी का ऐलान नहीं करने जा रहा हूं या किसी गठबंधन के काम में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। मेरा परसों (गुरुवार) से कैंपेन शुरू होगा- 'बात बिहार की'। मेरा लक्ष्य सिर्फ बिहार की तस्वीर बदलना है। इस यात्रा के दौरान अगले 100 दिन तक एक करोड़ से अधिक ऐसे युवाओं से मिलेंगे जो बिहार में नए नेतृत्व पर यकीन रखते हों और बिहार को भारत के टॉप 10 राज्यों में देखना चाहते हों।'


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पिता, पिछलग्गू... PK ने नीतीश को खूब सुनाया पिता, पिछलग्गू... PK ने नीतीश को खूब सुनाया Reviewed by Fast True News on February 17, 2020 Rating: 5

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