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हाथ में ईंटें क्यों थीं? जामिया छात्रों के ये तर्क

मोहम्मद इबरार, नई दिल्लीजामिया मिलिया इस्लामिया में 15 दिसंबर की घटना के दावे वाले तीन नए विडियो सोमवार सुबह जारी हुए। इनमें छात्रों को पीटती पुलिस को देखा जा रहा है तो लाइब्रेरी में घुसते प्रदर्शनकारी छात्र भी दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के लाइब्रेरी में घुसने का दावा करने वाले विडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों के हाथ में पत्थर भी हैं। छात्रों के हाथों में पत्थर क्यों? स्टूडेंट ग्रुप जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) का आरोप है कि ये सारे विडियो फर्जी हैं जिन्हें दिल्ली पुलिस अपनी करतूतों पर पर्दा डालने के मकसद से लीक कर रही हैं। कई छात्रों को मानना है कि अगर कुछ छात्रों ने अपने हाथों में पत्थर लिए भी होंगे तो पुलिस से आत्मरक्षा के लिए। कमिटी के सदस्यों ने कहा कि उनके पास 15 दिसंबर को नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा कोई विडियो नहीं है। जेसीसी मेंबर सफूरा जरगर ने कहा, 'जिस तरह से ये विडियोज लीक किए जा रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि जामिया के विद्यार्थियों को दोषी साबित करने की कोशिश हो रही है।' प्रामाणिकता की जांच हो: यूनिवर्सिटी ऐडमिनिस्ट्रेशन वहीं, इन विडियोज से दूरी बनाने वाले विश्वविद्यालय प्रशासन सोमवार को दोपहर 1 बजे सामने आया और फिर से कहा कि उसने विडियो लीक नहीं किए। जामिया के प्रॉक्टर वसीम अहमद खान ने कहा, 'हम यह निश्चत तौर पर नहीं कह सकते हैं कि विडियोज किसने लीक किए। इसका पता लगाना पुलिस का काम है।' प्रॉक्टर ने विडियो की प्रामाणिकता पर भी संदेह जताया और इनकी जांच की जरूरत बताई। पत्थर नहीं पर्स: जेसीसी हालांकि, रविवार को जारी हुए एक विडियो में बताया जा रहा है कि स्टूडेंट के हाथ में पत्थर है। हालांकि, जेसीसी का कहना है कि गौर से देखेंगे तो नजर आएगा कि यह पत्थर नहीं पर्स है, जो बीच में खुला भी है। लाइब्रेरी में बैठते वक्त अक्सर स्टूडेंट्स वॉलिट बाहर निकाल लेते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर विडियो पर सवाल किए जा रहे हैं कि पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ने मुंह पर रुमाल क्यों बांधा है? इसके जवाब में स्टूडेंट्स का कहना है कि पुलिस में कई राउंड टियर गैस फायर की थी जिससे पूरे इलाके में धुआं फैल गया था। पुलिस वालों ने खुद रुमाल बांधे हैं। विडियो में भी देखा जा सकता है। जांच पुलिस करवा सकती है। देखें: आत्मरक्षा में उठाए पत्थर: छात्र बीएड फाइनल ईयर के स्टूडेंट तंजील अहमद चौधरी ने बताया कि वो 15 दिसंबर को शाम 5.30 बजे कैंपस गेट के आसपास थे। तभी उन्हें टीयरगैस फटने की आवाजें सुनाई दीं। उन्होंने कहा, 'जब हमने धुआं उठते देखा तो मैंने और एक एक सीनियर स्टूडेंट ने वहीं डटे रहने का फैसला किया क्योंकि हमने साउथ दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलनी में माता की मंदिर के पास हुई हिंसा के बारे में सुना था। हमें लगा कि पुलिस वाले यूनिर्सिटी कैंपस में नहीं घुसेंगे।' तंजील अहमद उन तीन घायलों में से एक हैं जिन्हें यूनिवर्सिटी स्टेडियम की दीवारों के पास भित्तिचीत्रों में दिखाया गया है। उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन पुलिस वाले आए और छात्रों को पीटने लगे। मैं सेंट्रल कैंटीन की तरफ भागा तो देखा कि हम पर टीयर गैस के गोले फेंके जा रहे हैं। छात्र घबराकर नई और पुरानी लाइब्रेरी बिल्डिंग की तरफ दौड़े।' तंजील ने माना कि कुछ लोगों ने हाथों में ईंट-पत्थर उठा रखे थे।उन्होंने कहा, 'स्टूडेंट्स को लगा कि उन्हें पुलिस से बचने के लिए कुछ करना होगा।' आंसू गैस से बचने के लिए बांधे रूमाल: छात्र जामिया की भित्तिचित्रों में तंजील के अलावा जिन दो स्टूडेंट की तस्वीर है, उनमें एक मोहम्मद मुस्तफा जबकि दूसरा मोहम्मद मिन्हाजुद्दीन शामिल हैं। मुस्तफा ने कहा, 'कई स्टूडेंट्स ग्राउंड फ्लोर से यह कहते हुए भाग रहे थे कि पुलिस उन पर हमला कर रही है। आंसू गैस से बचने के लिए कई छात्रों ने अपने चेहरे पर रुमाल बांध लिए थे।' पोस्ट ग्रैजुएट स्टूडेंट मुस्तफा के हाथ में चोट आई और उनका लैपटॉप भी क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, मिन्हाजुद्दीन ने भी कुछ इसी तरह की घटना बयां की। उनकी एक आंख की रोशनी जा चुकी है। 22 जनवरी को अगली सुनवाई सोमवार को जारी विडियोज में पुलिस वालों को ग्राउंड फ्लोर पर लाइब्रेरी के दरवाजे से घुसते देखा जा सकता है। पुलिस वालों को सीसीटीवी कैमरे तोड़ते भी दिखाया गया है। उस दिन 21 वर्षीय स्टूडेंट शयान मुजीब को भी पैरों में चोट आई जिसका अब तक इलाज चल रहा है। बहरहाल, लाइब्रेरी में हुए पुलिस ऐक्शन पर एफआईआर करवाने के लिए जामिया प्रशासन कोर्ट गया है। अगली सुनवाई 17 मार्च को है। 22 जनवरी को कोर्ट ने पुलिस से ऐक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने को कहा था।


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हाथ में ईंटें क्यों थीं? जामिया छात्रों के ये तर्क हाथ में ईंटें क्यों थीं? जामिया छात्रों के ये तर्क Reviewed by Fast True News on February 17, 2020 Rating: 5

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