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मुस्लिम इलाकों में बंपर वोट, जानें कहां कितने

नई दिल्ली 2020 में इस बार वोटिंग का आंकड़ा 65 प्रतिशत से कम रहा। लेकिन इस बार पहले हुए चुनाव की तुलना में ज्यादा महिलाएं घर से बाहर आईं और वोट किया। रविवार को चुनाव आयोग द्वारा साझा किए गए वोटर टर्नआउट डेटा से यह खुलासा हुआ है। इतना ही नहीं, महिला और पुरुष वोटरों के बीच भी सिर्फ 0.07 प्रतिशत मतदान का ही अंतर रह गया। आयोग के प्रमुख (CEO) रनबीर सिंह ने कहा कि शनिवार को हुई वोटिंग में 62.62 प्रतिशत महिलाओं जबकि 62.55 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाला। वहीं कुल वोटिंग प्रतिशत 62.59 प्रतिशत रहा। 2015 की तुलना में बढ़ीं बता दें कि 2015 में हुए विधानसभा चुनाव से तुलना करें तो इस साल वोटिंग प्रतिशत कम रहा। 2015 में 67.1 प्रतिशत वोटिंग हुई थी और 89.3 लाख लोगों ने मतदान किया था। वहीं इस बार 92.5 लाख लोगों ने मतदान किया यानी 3.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ 3.1 लाख ज्यादा वोटर रहे। 2015 के विधानसभा चुनाव में मतदान करने वाले 49.9 लाख पुरुष मतदाताओं की संख्या इस बार बढ़कर 50.7 लाख हो गई। यानी 1.5 प्रतिशत (76,361 वोटर) पुरुष मतदाता इस साल बढ़े। 2015 में 39.3 लाख महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था जबकि 2015 में यह संख्या 41.7 लाख थी। 2020 में महिला वोटरों की संख्या में 6.1 प्रतिशत यानी 2.4 लाख का इज़ाफा हुआ। 2008 के विधानसभा चुनावों में पुरुष और महिला वोटरों के बीच 1.7 प्रतिशत का अंतर था जो 2013 में गिरकर 0.8 प्रतिशत रह गया। लेकिन 2015 में यह अंतर फिर बढ़कर 1.1 प्रतिशत हो गया। लेकिन अब 2020 में यह प्रतिशत गिरकर सिर्फ 0.07 प्रतिशत रह गया है। इस साल कम हुआ वोटिंग प्रतिशत 2015 में दिल्ली में 67.12 प्रतिशत रेकॉर्ड वोटिंग हुई, जिसमें महिला वोटर 66.49 प्रतिशत जबकि पुरुष वोटर 67.63 प्रतिशत था। 2013 में कुल 65.63 प्रतिशत वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया जिनमें 66.03 प्रतिशत पुरुष और 65.14 महिला वोटर शामिल थे। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनावों से तुलना करें तो चुनाव आयोग के मुताबिक दिल्ली में वोटिंग प्रतिशत 2.4 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों के लिए कुल 60.2 प्रतिशत वोटरों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था। आंकड़ों की बात करें तो 2020 के चुनावों में कुल 1,47,382 वोटरों (81,05,236 पुरुष और 66,80,277 महिलाएं और 869 थर्ड जेंडर) में से 92,54,843 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इनमें 50,75,662 पुरुष और 41,78,841 महिला वोटर शामिल हैं। मुस्लिम इलाकों में सबसे ज्यादा वोटिंग रविवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आकंड़ों से पता चलता है कि पांच विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। इनमें बल्लीमारान (71.6 प्रतिशत), सीलमपुर (71.2 प्रतिशत), मुस्तफाबाद (70.5 प्रतिशत), गोकलपुर (70.5 प्रतिशत) और मटिया महल (70.4 प्रतिशत) शामिल हैं। इनमें से तीन विधानसभा क्षेत्र उत्तर पूर्व दिल्ल संसदीय क्षेत्र में जबकि दो चांदनी चौक लोकसभा सीट में पड़ते हैं। गौर करने वाली बात है कि इन पांच विधानसभा सीटों में से बल्लीमारान, सीलमपुर और मटिया महल में मुस्लिम वोटर सबसे ज्यादा हैं। वहीं मुस्तफाबाद में भी मुस्लिम वोटरों की संख्या अच्छी खासी है। गोकलपुर एक आरक्षित सीट है और यहां 2015 विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 74.2 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। वहीं एक और आरक्षित विधानसभा सीट सीमापुरी 73.3 फीसदी मतदान के साथ 2015 में दूसरे नंबर पर था, लेकिन इस बार यह 68 प्रतिशत वोटिंग के साथ छठे नंबर पर है। इस साल जिन 5 विधानसभा सीटों पर सबसे कम वोटिंग हुईं, उनमें दिल्ली कैंट सबसे आगे है। दिल्ली कैंट में सिर्फ 45.4 प्रतिशत वोटिंग हुई। वहीं नई दिल्ली में 52.1 फीसदी, महरौली में 56.5 फीसदी, आरके पुरम में 56.6 फीसदी और नांगलोई जाट में 56.7 फीसदी वोटिंग ही हुई। इन पांच विधानसभाओं में सबसे ज्यादा संख्या में सरकारी कर्मचारी रहते हैं और ये नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र का हिस्सा हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि शनिवार को जारी किए गए डेटा और रविवार को अंतिम गणना के बाद आए डेटा में काफी अंतर है।


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मुस्लिम इलाकों में बंपर वोट, जानें कहां कितने मुस्लिम इलाकों में बंपर वोट, जानें कहां कितने Reviewed by Fast True News on February 10, 2020 Rating: 5

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