सोनभद्र की 'दोस्ती' बंगाल में क्या गुल खिलाएगी?
कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में वर्षों से एक-दूसरे की दुश्मन रही तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी के बीच रिश्तों पर जमी बर्फ अब पिघलती दिख रही है। इसका एक ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देखने को मिला। इसे महज संयोग कहें या सियासी दोस्ती की शुरुआत सोनभद्र में 10 लोगों की हत्या के बाद पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए शुक्रवार को प्रियंका गांधी जहां धरने पर बैठ गईं, वहीं टीएमसी सांसदों का दल भी सोनभद्र जाने के लिए वाराणसी पहुंच गया। बाद में प्रियंका गांधी ने टीएमसी सांसदों से वाराणसी एयरपोर्ट पर मुलाकात कर स्पष्ट संकेत दे दिया कि राजनीति में कोई भी स्थाई दुश्मन नहीं होता है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को मिर्जापुर के चुनार किले के परिसर में सोनभद्र संघर्ष के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। प्रियंका से मिलने पहुंचे 15 लोगों में 7 महिलाएं भी थीं। मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि मेरा मकसद पूरा हुआ, जा रही हूं पर वापस आऊंगी। मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवार की महिलाएं प्रियंका के गले लगकर फफक पड़ीं। प्रियंका ने उन्हें गले लगाया, पानी पिलाया और उनकी आपबीती सुनीं। बातचीत के दौरान कई बार कांग्रेस महासचिव का भी गला रुंध गया। टीएमसी प्रतिनिधिमंडल से मिलीं प्रियंका मुलाकात के बाद प्रियंका ने मीडिया से कहा कि इन बच्चों ने अपने माता-पिता खो दिए हैं। कुछ परिवार ऐसे हैं, जिनके बच्चे और माता-पिता अस्पताल में भर्ती हैं। ये लोग पिछले डेढ़ महीने से अपनी दिक्कतों के बारे में प्रशासन को सूचित कर रहे थे। गांव की महिलाओं के खिलाफ कई फर्जी मामले भी दर्ज किए गए हैं। इनके साथ जो भी हुआ, बहुत गलत हुआ। इसके बाद वह वाराणसी के लिए रवाना हो गईं। वाराणसी में एयरपोर्ट पर टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल भी धरने पर बैठा था। इसमें टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद डेरेक ओ ब्रायन भी शामिल थे। प्रियंका गांधी ने एयरपोर्ट पर उनसे मुलाकात की और बात की। बाद में टीएमसी ने ट्विटर पर एक विडियो ट्वीट करके प्रियंका को धन्यवाद दिया। टीएमसी ने लिखा, 'धरने पर बैठे टीएमसी प्रतिनिधिमंडल के पास आने और सोनभद्र नरसंहार पर अपने विचार साझा करने प्रियंका गांधी धन्यवाद।' पश्चिम बंगाल में करो या मरो की स्थिति राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी और डेरेक ओ ब्रायन की यह मुलाकात काफी मायने रखती है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि दोनों ही दल किसी साझा चुनौती से निपटने के लिए एक साथ आ सकते हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव नतीजों ने दोनों ही दलों के लिए पश्चिम बंगाल में करो या मरो की स्थिति पैदा कर दिया है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 42 में से 18 सीटें जीत ली हैं और 22 सीटों पर दूसरे नंबर पर आई है। बीजेपी की इसी चुनौती से निपटने के ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और वामदलों के साथ गठजोड़ की अपील की थी लेकिन दोनों ही दलों ने ममता के साथ दोस्ती को ना कह दिया था। पश्चिम बंगाल में अब 2021 में लोकसभा चुनाव होना है। बीजेपी जहां फ्रंटफुट पर खेल रही है वहीं टीएमसी बैकफुट पर है। लोकसभा चुनाव के बाद टीएमसी के करीब 40 नेता अब तक बीजेपी में शामिल हो गए हैं। राज्य में दोनों ही दलों के कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष जारी है। माना जा रहा है कि बीजेपी की चुनौती से निपटने के लिए टीएमसी-कांग्रेस साथ आ सकते हैं।
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सोनभद्र की 'दोस्ती' बंगाल में क्या गुल खिलाएगी?
Reviewed by Fast True News
on
July 20, 2019
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