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पूर्व सांसद एके रॉय का निधन, स्पीकर की श्रद्धांजलि

धनबादपूर्व लोकसभा सांसद और (एमसीसी) के संस्थापक एके रॉय का रविवार को झारखंड के एक अस्पताल में निधन हो गया। रॉय 90 साल के थे और अविवाहित थे। वरिष्ठ वाम नेता और सीटू झारखंड प्रदेश समिति के मुख्य संरक्षक रॉय को उम्र संबंधी दिक्कतों के कारण 8 जुलाई को धनबाद के केंद्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके कारण उनका निधन हुआ। स्पीकर ने दी श्रद्धांजलि लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने रॉय के निधन पर दुख जताया है और दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। स्पीकर ने ट्वीट कर रॉय को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कामगारों की आवाज रहे के निधन से भारतीय राजनीति को गहरी क्षति पहुंची है। उन्होंने बताया कि वह तीन बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। गौरतलब है कि रॉय झारखंड आंदोलन के संस्थापकों में से एक थे। तीन बार रहे लोकसभा सांसद रॉय 1977, 1980 और 1989 में धनबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे। इसके अलावा उन्होंने बिहार विधानसभा में 1967, 1969 और 1972 में सिंदरी सीट का प्रतिनिधित्व किया था। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सुप्रीमो शिबू सोरेन और पूर्व सांसद दिवंगत बिनोद बिहारी महतो के साथ रॉय ने 1971 में बिहार से अलग राज्य की मांग को लेकर झारखंड आंदोलन शुरू किया। झारखंड 15 नवंबर 2000 को अलग राज्य बन गया। बांग्लादेश के गांव में हुआ जन्म रॉय का जन्म सपुरा गांव में हुआ जो अब बांग्लादेश में है। उनके पिता शिवेंद्र चंद्रा रॉय वकील थे। उन्होंने 1959 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से रसायन शास्त्र में एमएससी की और 2 साल तक एक निजी कंपनी में काम किया। बाद में वह साल 1961 में पीडीआईएल सिंदरी में शामिल हो गए। उन्होंने 9 अगस्त 1966 को बिहार बंद आंदोलन में भाग लिया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तत्कालीन सरकार का विरोध करने के कारण प्रॉजेक्ट्स ऐंड डिवेलपमेंट इंडिया लिमिटेड (पीडीआईएल) प्रबंधन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। समर्थक बुलाते थे 'राजनीतिक संत' इसके बाद रॉय श्रमिक संघ में शामिल हुए और उन्होंने सिंदरी फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) और निजी कोयला खान मालिकों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। साल 1967 में उन्होंने के टिकट पर बिहार की सिंदरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत गए। हालांकि, उन्होंने सीपीएम से इस्तीफा दे दिया और अपनी मार्क्सवादी समन्वय समिति बनाई। रॉय को उनके साथी और समर्थक 'राजनीतिक संत' बुलाते थे क्योंकि अंतिम सांस लेने तक उनका बैंक खाता 'शून्य बैलेंस' ही दिखाता रहा। सांसदों के पेंशन और भत्ते बढ़ाने का किया था विरोध रॉय पिछले एक दशक से धनबाद से 17 किलोमीटर दूर पथाल्दिह इलाके में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर में रह रहे थे। इससे पहले वह यहां पुराना बाजार में टेंपल रोड पर अपने पार्टी कार्यालय में रहे। पूर्व एमसीसी विधायक आनंद महतो ने कहा, 'वह देश के पहले सांसद थे जिन्होंने सांसदों के लिए 1989 में भत्ते और पेंशन बढ़ाने वाले प्रस्ताव का विरोध किया था हालांकि उनका प्रस्ताव गिर गया।'


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पूर्व सांसद एके रॉय का निधन, स्पीकर की श्रद्धांजलि पूर्व सांसद एके रॉय का निधन, स्पीकर की श्रद्धांजलि Reviewed by Fast True News on July 21, 2019 Rating: 5

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